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वसुदेव Narendra Kohli

वसुदेव

Narendra Kohli

Published
ISBN : 9788121614733
Paperback
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 About the Book 

नरेनदर कोहली के उपनयास में अवतार के मानवीकरण का परयतन तयाग कर कृषण को ‘अवतार’ के रूप में ही चितरित किया गया है। समाज, राजनीति और अधयातम-तीनों को बटकर कथा की जो रससी बनाई गई है, उसका नाम है ‘वसुदेव’।‘वसुदेव’ चरम जिजीविषा की कथा है, जो कषट देवकी और ‘Moreनरेन्द्र कोहली के उपन्यास में अवतार के मानवीकरण का प्रयत्न त्याग कर कृष्ण को ‘अवतार’ के रूप में ही चित्रित किया गया है। समाज, राजनीति और अध्यात्म-तीनों को बटकर कथा की जो रस्सी बनाई गई है, उसका नाम है ‘वसुदेव’।‘वसुदेव’ चरम जिजीविषा की कथा है, जो कष्ट देवकी और ‘वसुदेव’ ने सहे, संसार के इतिहास में उसकी कोई तुलना नहीं। स्वयं बन्दियों का जीवन व्यतीत करते हुए। उन्होंने अपने छ:-छ: पुत्रों की हत्या होते हुए देखी।परिवार, समाज, शासन अथवा राज्य के बाहर कहीं से भी किसी प्रकार की सहायता की कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही थी, किन्तु उनकी संघर्ष की ऊर्जा समाप्त नहीं हुई। कंस उनके साहस को पराजित नहीं कर सका। अपने सातवें पुत्र को इतने अद्भुत ढंग से बचा ले गए, जिसे हमारी कथाओं योगमाया की लीला ही माना जा सका। भक्ति के धरातल पर आस्था की यह कथा ही राजनीति के धरातल पर एक अत्यन्त दुष्ट और शक्तिशाली शासक के विरुद्ध स्वतंत्रता के संघर्ष की गाथा है। ‘वसुदेव’ के आरम्भिक संघर्ष के पश्चात् इस युद्ध को स्वयं कृष्ण लड़ते हैं और गोकुल से आरम्भ कर, मथुरा और द्वारका से होते हुए, कुरुक्षेत्र तक वे राक्षसों का वध करते हैं।इस उपन्यास की कथा ‘वासुदेव’ की नहीं, बल्कि ‘वसुदेव’ की है। व्यक्ति के धरातल पर वह चरित्र की शुद्धता की ओर बढ़ रहे हैं, समाज के धरातल पर सारे प्रहार अपने वक्ष पर झेलकर जागृति का शंख फूंक रहे हैं और राजनीति के धरातल पर एक सच्चे क्षत्रिय के रूप में शस्त्रबद्ध हो सारी दुष्ट शक्तियों से लोहा ले रहे हैं। इसमें उपनिषदों का अद्वैत वेदान्त भी है, भागवत की लीला और भक्ति भी तथा महाभारत की राजनीति भी।किन्तु नरेन्द्र कोहली कहीं नहीं भूलते कि यह कृति एक उपन्यास है। एक मौलिक सृजनात्मक उपन्यास। इस अद्भुत कथा में दुरूहता अथवा जटिलता नहीं है। यह आज का उपन्यास है। आप इसमें अपनी और अपने ही युग की अत्यन्त सरस कथा पाएंगे।